Wednesday, April 20, 2011

रंग



रंगों की रंगोली है
तितली ने जो घोली है
बाग़-बगीचे फूल-फूल
कोयल की मीठी बोली है

कोई एक चितेरा है
आसमान पर डेरा है
अपनी कूची से लाल रंग
पूरब-पश्चिम में फेरा है

दिन सोने में नहाता है
रातें चाँदी में हैं चमचम
नीला आकाश पीला सूरज
हर रंग में रंग जाते हैं हम

रंग-बिरंगी धरती है
लोगों से यह कहती है
हर रंग में रंगा संसार है
पर सबसे सुंदर प्यार है।

वीणा सिंह  
(राहिल और रेहान के लिए दादी की रचना)  

No comments:

Post a Comment