रंगों की रंगोली है
तितली ने जो घोली है
बाग़-बगीचे फूल-फूल
कोयल की मीठी बोली है
कोई एक चितेरा है
आसमान पर डेरा है
अपनी कूची से लाल रंग
पूरब-पश्चिम में फेरा है
दिन सोने में नहाता है
रातें चाँदी में हैं चमचम
नीला आकाश पीला सूरज
हर रंग में रंग जाते हैं हम
रंग-बिरंगी धरती है
लोगों से यह कहती है
हर रंग में रंगा संसार है
पर सबसे सुंदर प्यार है।
वीणा सिंह
(राहिल और रेहान के लिए दादी की रचना)
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