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Thursday, November 12, 2020

शायद हम उन दिनों

 शायद हम उन दिनों

जीते थे ख़्वाब में 

कोई सवाल ले

डूबे थे आप में 

 

लोग ये कहते हैं 

मैं ही वाक़िफ़  न था 

वरना कुछ देर को 

मौसम बदला तो था 

 

उंगलियाँ थामकर 

घण्टों थे  साथ हम 

दरिया किनारे पर 

देर गई रात हम 

 

कितने तूफ़ान उठे 

मैं ही बेफिक्र था 

वरना कुछ देर को 

मौसम बदला तो था

 

कब धरती हरियाई

कब मौसम लाल था 

अपने ही दिल में 

जवाब था सवाल था

 

कितने अरमान उठे 

मैं ही वाक़िफ़ न था

अपने ही दिल में 

मौसम बदला सा था 

 

दिल में कोंपल खिली

निंदयाई अधजगी 

एक जादू सी बँधी 

अरुणाई में रंगी 

 

लोग ये कहते हैं कि 

मैं ही वाक़िफ़ न था

मैं तुम से कहता हूँ

मौसम बदला तो  था      


वीणा सिंह