शायद हम उन दिनों
जीते थे ख़्वाब में
कोई सवाल ले
डूबे थे आप में
लोग ये कहते हैं
मैं ही वाक़िफ़ न था
वरना कुछ देर को
मौसम बदला तो था
उंगलियाँ थामकर
घण्टों थे साथ हम
दरिया किनारे पर
देर गई रात हम
कितने तूफ़ान उठे
मैं ही बेफिक्र था
वरना कुछ देर को
मौसम बदला तो था
कब धरती हरियाई
कब मौसम लाल था
अपने ही दिल में
जवाब था सवाल था
कितने अरमान उठे
मैं ही वाक़िफ़ न था
अपने ही दिल में
मौसम बदला सा था
दिल में कोंपल खिली
निंदयाई अधजगी
एक जादू सी बँधी
अरुणाई में रंगी
लोग ये कहते हैं कि
मैं ही वाक़िफ़ न था
मैं तुम से कहता हूँ
मौसम बदला तो था
वीणा सिंह
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