Showing posts with label बरसता दिन है बारिश की नमी है. Show all posts
Showing posts with label बरसता दिन है बारिश की नमी है. Show all posts

Saturday, May 21, 2011

बरसता दिन है बारिश की नमी है




बरसता दिन है बारिश की नमी है

भीगे फूलों में लिपटी सी जमीन है

चलो इनसे भी कोई बात कर लें ।

खिड़की के बंद शीशे पार उनके

एक लता छुईमुई सी चुपके चुपके

दस्तक देती है मुलाकात कर लें ।

यों ही कमरे में हम चुपचाप बैठें

आँखें मूँद कुछ खोये से लेटें

चलें हम आज ख़ुद से बात कर लें ।

मुद्दतें हो गयीं परियों के किस्से

जो कल तक सब रहे हमारे हिस्से

उन्हें ढूंढे कोई ऐसी रात कर लें ।


वीणा सिंह