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Sunday, November 8, 2020

चाँद

 


धुने हुए बादलों की खिड़की से झांके

 

जुगनू से टिमटिम तारों  को आंके 

 

तारों की भीड़ में अकेला सा खोया है

 

लगता है बस कुछ पहले ही रोया है 

 

आसमां की फील्ड में फुटबॉल बन पड़ा है

 

किसी शोकेस  में मैनेक्विन खड़ा है 

 

नीली गहराई में सोने का पैसा है 

 

हाथ नहीं आता है, बस ऐसा वैसा है.


वीणा सिंह