धुने हुए बादलों की खिड़की से झांके
जुगनू से टिमटिम तारों को आंके
तारों की भीड़ में अकेला सा खोया है
लगता है बस कुछ पहले ही रोया है
आसमां की फील्ड में फुटबॉल बन पड़ा है
किसी शोकेस में मैनेक्विन खड़ा है
नीली गहराई में सोने का पैसा है
हाथ नहीं आता है, बस ऐसा वैसा है.
वीणा सिंह