Sunday, November 8, 2020

जो आसमान पे बैठा है


 

वो जो आसमान पे बैठा है हरुफ बिगाड़ने की साजिश में 
कि बाज़ी पलट भी जाती है जरा सी मोहरों की जुम्बिश में 
सफर में उस जगह जायें क्योंकर जहाँ से रात आके मिलती हो 
कोई तो मोड़ उस जगह होगा कि जहाँ सुबह आके खिलती हो 
खुदा के बाजुओं में इन दिनों ताकत कहाँ इतनी 
कि धर के हाथ शाने पे हमारे कोई राहत दे 
कि हम तो शिद्दत्तों से बारहा सजदे में झुक जाएँ 
उससे बन पड़े तो मेरे वीराने को रंगत दे 



 वीणा  सिंह

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