कथावाचक ने कही एक उलटी कथा
नायिका न रम्भा न उर्वशी थी
नायक की जान भी सांसत में फँसी थी
विदूषक के चेहरे पर खलनायकी हँसी थी
अजीब घालमेल था
श्रृंगार के साथ रौद्र
हास्य और वीभत्स का मेल था
लोगों ने रोका
चिल्लाकर टोका - `निरा बकवास है!
किसी आर्ट फिल्म-सा उबाऊ उचाट है'
कथा, पर, बढ़ी
रंगहीन भावों पर उतरी चढ़ी
पथरीले रास्तों के कई मोड़ मुड़ी
हँसने पर रोई, रोने पर हँसी
क्या ही अजब था
पिटारा गजब था
लोगों ने धिक्कारा-
कथा नहीं व्यथा है
सख्त सिरदर्द है -लाइलाज मर्ज है
पिछले जन्म का अनचुका कर्ज है
शाम तक ऐसे ही चलती रही कथा
कष्ट से पीड़ा से लोगों ने आह भरी
वाचक ने ममता से कहा - `अब इति'
शंखध्वनि हुई
लोगों ने हर्ष से शीश नवाए
किसी ने कहा कथा प्रभु की थी
किसी ने कहा - हम सबकी .
राजीव
अजीब घालमेल था
श्रृंगार के साथ रौद्र
हास्य और वीभत्स का मेल था
लोगों ने रोका
चिल्लाकर टोका - `निरा बकवास है!
किसी आर्ट फिल्म-सा उबाऊ उचाट है'
कथा, पर, बढ़ी
रंगहीन भावों पर उतरी चढ़ी
पथरीले रास्तों के कई मोड़ मुड़ी
हँसने पर रोई, रोने पर हँसी
क्या ही अजब था
पिटारा गजब था
लोगों ने धिक्कारा-
कथा नहीं व्यथा है
सख्त सिरदर्द है -लाइलाज मर्ज है
पिछले जन्म का अनचुका कर्ज है
शाम तक ऐसे ही चलती रही कथा
कष्ट से पीड़ा से लोगों ने आह भरी
वाचक ने ममता से कहा - `अब इति'
शंखध्वनि हुई
लोगों ने हर्ष से शीश नवाए
किसी ने कहा कथा प्रभु की थी
किसी ने कहा - हम सबकी .
राजीव
No comments:
Post a Comment